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कहने के लिए है महिलाओं की सुरक्षा….

भारत मे महिला सुरक्षा के जितने दावे किए जाते है, उन आंकड़ो को सुनने में तो अच्छा लगता है, लेकिन क्या उन दावों का धरातल पर कोई अस्तित्व है? यह सबसे बड़ा प्रश्न बन चुका है , जिसका जवाब शायद किसी के पास नहीं है।

21वी सदी के भारत में जहाँ हम अंतरिक्ष की ऊंचाइयों पर पहुंचने की बात करते है , वहीं दूसरी तरफ हम अपने समाज मे महिलाओं को उचित सुरक्षा प्रदान कर पाने में कहीं न कहीं असफल नजर आरहे है।

भारत में पुनः एक बार फिर घिनौना अपराध सामने आया है। हैदराबाद की रहने वाली प्रियंका रेड्डी जो पेशे से एक डॉक्टर है ,जिसका सामूहिक रेप करने के पश्चात जिंदा जलाकर मौत के घाट उतार दिया। कहते है धरती पर डॉक्टरों को ईश्वर का दर्जा दिया गया है, लेकिन कुछ मानसिक रोगियों के चलते धरती के भगवान भी रेप जैसे अपराध के शिकार बन जाते है।

क्या है पूरा मामला

प्रियंका रेड्डी की स्कूटी हैदराबाद के बाहर स्थित एक टोल प्लाजा पर खड़ी थी। जहां चारों आरोपियों की नज़र पहले से प्रियंका पर थी।

एक आरोपी ने पहले ही प्रियंका को स्कूटी पार्क करते देख लिया था। उसी ने प्रियंका के स्कूटी की हवा निकाल दी थी। जब प्रियंका लौटी तब आरोपियों ने उसे मदत करने का प्रस्ताव रखा। प्रियंका ने एक ट्रक ड्राइवर को उसे घूरते हुए देख लिया और उसने डर के मारे मदत स्वीकार कर लिया। प्रियंका ने अपने बहन को फोन कर घटना के बारे में सूचित कर दिया था। प्रियंका ने अपनी बहन से कहा कि वो उससे बात करती रहे, परन्तु छह मिनट बाद फोन बंद हो गया। मदत के बहाने चारों आरोपियों ने पीड़िता को एक अंडरपास के नीचे ले जाकर उसका सामूहिक बलात्कार किया। जिसके बाद पेट्रोल डालकर प्रियंका की हत्या कर दी। जब 11 बजे तक लड़की घर नहीं लौटी तब घर वालों को चिंता हुई और परिवार जनों ने नज़दीकी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

अगले दिन हैदराबाद टोल प्लाजा से तीस किलोमीटर दूर एक किसान ने अधजला शव देखकर पोलिस को सूचित किया। पुलिस ने परिवार जनों को उसी घटना स्थल पर बुलाया जहां पर आधे जले स्कार्फ़ और एक लॉकेट से शव की शिनाख्त हुई।

परिवार की गुहार

प्रियंका की माँ ने कहा कि पुलिस उन्हें लगातार दौड़ती रही। यदि पुलिस ने तत्काल कार्यवाही की होती तो उनकी बेटी बच सकती थी। पुलिस ने उन्हें पहले शमसाबाद थाने में जाने को कहा क्योंकि वो क्षेत्र उनके थाना क्षेत्र में नहीं आता था। पीड़िता का परिवार जब वहाँ पहुंच तो उनके साथ कुछ सिपाही भेजे गए और सुबह 4 बजे तक खोजबीन हुई।पीड़ित की माँ का कहना है कि उनकी बेटी बड़ी मसूम थी और जिन्होंने उसके साथ थ दुष्कर्म किया हैं उन्हें जिंदा जलाया जाए

बढ़ रहे हैं महिलाओं के प्रति अपराध

राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि जबतक आरोपियों को सज़ा नहीं मिलती तब तक हर तरह का प्रयास जारी रहेगा। आयोग ने साइबराबाद पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर विस्तृत जानकारी माँगी है।

देश मे बढ़ रहा है बलात्कारियों के विरुद्ध आक्रोश

इस घटना के पश्चात पूरे देश मे जनाक्रोश बढ़ चुका है। सड़क से संसद तक सबमे इस घटना को लेकर नाराज़गी देखी जा रही है। जनता द्वारा बलात्कारियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की माँग की जा रही है। इस मामले में चारो आरोपी जिनके नाम मोहम्मद पाशा ,केशव, शिवा और नवीन है , इन चारों को ज़िंदा जलाने की मांग एक बड़े पैमाने पर की जा रही है। तेलंगाना राज्य को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्य माना जाता है। तेलंगाना के गृह मंत्री मोहम्मद महमूद अली ने इस घटना को लेकर बयान देते हुए कहा कि प्रियंका एक पढ़ी लिखी लड़की थी उन्हें पुलिस को फ़ोन करना चाहिए था। महमूद अली के इस बयान की पूरे भारत मे कड़ी निंदा की है।

और सख़्त हो कानून

आईपीसी के सेक्शन 367A के अनुसार बलात्कार के लिए ताउम्र जेल का प्रावधान है।वहीं सामूहिक बलात्कार के लिए आरोपियों के लिए 20 साल से ज़्यादा की सज़ा का प्रावधान है,यह ताउम्र कैद में भी बदली जा सकती है।

बलात्कर के दौरान मृत्यु हो जाने पर अलग कानूनी प्रक्रिया है ।

इनसब कानूनों को और भी सख्त करने की माँग उठाई जा रही है। 2018 में बनाए कानून के अनुसार 12 साल से कम उम्र की लड़की के बलात्कार पर सज़ा ए मौत का प्रावधान रखा गया है।इसी प्रावधान को हर उम्र की लड़की के बलात्कार पर लागू करने की माँग हो रही है।

यहाँ कानून एवं समाज दोनों को सख्त होने की आवश्यकता है। यदि यह दोनों सख्त हों तो ऐसे अपराधों पर रोक लगाना संभव है।

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