HINDI

द फ्लाइंग सिख’ उर्फ मिल्खा सिंह की जयंती पर जाने उनके जीवन के रोचक तथ्य

नई दिल्ली : मिल्खा सिंह का आज 92वां जयंती हैं, मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवंबर 1929 को गोविंदपुर में एक सिख जाट परिवार में हुआ था। मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख का उपनाम दिया गया था।

गौरतलब हैं, की मिल्खा सिंह किसी भी पहचान के मोहताज नहीं हैं, मिल्खा सिंह आज भी विश्व प्रसिद्ध धावक माने जाते हैं, भले ही अब वह इस दुनिया में नही हैं,  लेकिन बतौर धावक मिल्खा सिंह ने भारत को दुनिया में एक अलग पहचान दी है।

बचपन में  माता पिता बिछड़े

भारत-पाकिस्तान  विभाजन के समय हुए अफरा-तफरी में मिल्खा सिंह ने अपने माता पिता को खो दिया था। बाद में वे शरणार्थी  बनकर पाकिस्तान से भारत आ गए।

सेना में शामिल होकर की देश सेवा

मिल्खा सिंह ने भारतीय सेना में शामिल होने की कई कोशिश की । अतः कई कोशिशों के बाद वर्ष 1952 में मिल्खा सिंह को सफलता मिली, 1952 में वह सेना में विद्युत मैकेनिकल इंजीनियरिंग शाखा से जुड़े।

पुरस्कार द्वारा सम्मानित :

मिल्खा सिंह ने 1958 के एशियाई खेलों में 200 मीटर और 400 मीटर में स्वर्ण पदक जीते।

वर्ष 1958 के राष्ट्रमण्डल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीते।

वर्ष 1958 के एशियाई खेलों की 400 मीटर रेस में प्रथम स्थान के साथ स्वर्ण पदक जीते।

वर्ष 1958 के एशियाई खेलों की 200 मीटर रेस में प्रथम स्थान के साथ स्वर्ण पदक जीते।

वर्ष 1959 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किए गए।

वर्ष 1962 के एशियाई खेलों की 400 मीटर दौड़ में प्रथम स्थान के साथ स्वर्ण पदक जीते।

वर्ष 1962 के एशियाई खेलों की 4*400 रिले रेस में प्रथम स्थान के साथ स्वर्ण पदक जीते।

वर्ष 1964 के कलकत्ता राष्ट्रीय खेलों की 400 मीटर रेस में द्वितीय स्थान के साथ रजत पदक जीते।

कोरोना के कारण दुनिया को कहा अलविदा

मिल्खा सिंह ने 18 जून, 2021 को चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर अस्पताल में अंतिम सांस ली। मिल्खा कोविड-19 से ग्रस्त थे। चार-पाँच दिन पहले उनकी पत्नी का देहान्त भी कोविड से ही हुआ था।

Tags
Show More
Close

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker