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पीएम मोदी इस महीने अपने सपनों का काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना लोगों को समर्पित करेंगे

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना से काशी विश्वनाथ मंदिर सीधे तौर पर गंगा तट से जुड़ेगा

लखनऊ, ‘काशी के प्राचीन गौरव को पुनर्स्थापित करने के पीएम मोदी के सपने को साकार करने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देशन में भव्य काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना अत्यंत पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरी होने के करीब है।‘उक्त बातें वाराणसी के मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहीं।

बुधवार को मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, दीपक अग्रवाल ने बताया कि “5,000 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में निर्मित, गलियारे ने मंदिर परिसर को कम कर दिया है, जो पहले तीन तरफ इमारतों से घिरा हुआ था। इस परियोजना काशी विश्वनाथ मंदिर सीधे तौर पर गंगा तट से जुड़ेगा।

परियोजना का विवरण देते हुए अग्रवाल ने आगे बताया कि जब इस परियोजना की परिकल्पना की गई थी, तो मंदिर परिसर की घनी संरचना को देखते हुए इस कार्य को असंभव माना जाता था, हालांकि, केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के संगठित और समर्पित प्रयासों के बावजूद, कोविड -19 महामारी के दौर में  पूरी प्रक्रिया को अत्यधिक पारदर्शिता के साथ रिकॉर्ड समय में पूरा किया जा रहा है।

दीपक अग्रवाल ने कहा काशी विश्वनाथ विशेष क्षेत्र विकास बोर्ड (KVSADB) को परियोजना के नियोजन और निष्पादन का कार्य सौंपा गया था। बोर्ड के द्वारा इस परियोजना को युद्ध स्तर पर आगे बढ़ाया गया, जिसमें संपत्ति को खाली कराने से लेकर लोगों को मुआवजा देने तक शामिल है। उन्होंने कहा कि परियोजना का निष्पादन सबसे पारदर्शी तरीके से किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप परियोजना को किसी मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ा। सदियों पुराने प्राचीन मंदिर, जो पहले छिपे हुए थे, अब दिखाई दे रहे हैं, उन्हें संरक्षित किया जाएगा और जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

परियोजना के आर्किटेक्ट बिमल पटेल ने बताया कि मंदिर के मूल ढांचे से छेड़छाड़ किए बगैर सौंदर्यीकरण के अलावा पर्यटकों के लिए सुविधाओं में इजाफा किया गया है। इस कार्य में मंदिर चौक, वाराणसी सिटी गैलरी, संग्रहालय, बहुउद्देशीय सभागार, हॉल, यात्री सुविधा केंद्र, मोक्ष गृह, गोदौलिया गेट, भोगशाला, पुजारियों और सेवादारों के लिए आश्रय, धार्मिक पुस्तक केंद्र समेत अन्य निर्माण शामिल हैं।

बिमल पटेल ने आगे कहा कि पीएम की मंशा के अनुरूप भक्तों को गंगा से मंदिर तक पानी ले जाने में सक्षम बनाना था और हमने मंदिर की भव्यता को बहाल करने के लिए मंदिर परिसर को पुनर्गठित करने का काम किया। पीएम ने कहा था कि ऐसा रास्ता बनाएं जिससे मंदिर दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं का मन प्रफुल्लित हो जाए।

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