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शनिवार का दिन अयोध्या के फैसले के लिए चुना गया

मुम्बई- आज भारतीय न्याय व्यवस्था एवं  पूरे भारत के लिए सबसे बड़ा दिन है। आज अयोध्या मामले का फैसला सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच द्वारा सुनाया जाएगा।

उत्सुकता के साथ साथ चिंता भी बनी हुई है कि,  कहीं फैसला आने के साथ देश मे पुनः 1992- 1993 जैसे साम्प्रदायिक दंगे न हो। इसी बीच देश वासियों से शांति बनाए रखने की प्रार्थना सरकारों एवं धर्म गुरुओं द्वारा की गई है।

इसी के साथ जनता के मन मे यह प्रश्न उठ रहा है कि आखिर फैसले के लिए शनिवार का दिन ही क्यों चुना गया ?

राम मंदिर के सुनवाई के साथ एक बड़ा खतरा साम्प्रदायिक दंगों का है, तो वहीं रंजन गोगोई के कार्यकाल का आखिरी दिन 15 अक्टूबर है।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कल उत्तरप्रदेश के अफसरों को बुला कर अपने चेम्बर में बैठक के साथ साथ सुरक्षा का जायज़ा लिया। अयोध्या का फैसले का अचानक  ऐलान करने का हेतु ये था कि, किसी भी उपद्रवी को किसी भी तरह का उपद्रव की तैयारी करने का अवसर न मिले।

इसका ध्यान रखते  हुए इतना बड़ा फैसला  शनिवार को सुनाया जा रहा है  , इसका ऐलान शुक्रवार शाम को कर दिया गया और पूरी रात सुरक्षा बलों को मोर्चा संभालने  का वक्त दे दिया गया।

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