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5 लाख से ज़्यादा दियो से जग- मगाया देश

मुंबई– भारत एकता और विविधता का देश है। भारत के लोग अपनी परंपराओं को पालन करने में पीछे नहीं रहते हैं । देश में 29 राज्य और प्रत्येक राज्य में विभिन्न रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन किया जाता है। ऐसा ही कुछ नज़ारा दीपावली में देखने मिलता है , इस त्यौहार में हर जगह रोशनी ही नजर आती है कहते है दिवाली उजाले का प्रतीक है , हर जगह दीपों द्वारा अंधकार मिटाकर प्रकाश फैलाया जाता है।

आज इस पर्व को पूरे देश मे पूरे ज़ोरो-शोरों से मनाया जा रहा है। बाजारों में मिठाइयों, कपड़ो और पटाखों कि भरमार लग चुकी है। सोनारों के लिए दीपावली ये सबसे खास त्योहार बन जाती है,जब बहुत बड़ी संख्या में बाजारों में लोग सोने-चाँदी के बने गहनों को खरीदारी करते है।

दीपावली का इतिहास और परंपरा

कहते है , त्रेता युग में जब भगवान राम,रावण का वध करके अयोध्या लौटे थे, तो उन्हें लौटते रात हो चुकी थो, रात्रि अमावस्या की थी जिस कारण भगवान राम को रात्रि में महल आते वक्त कोई दिक्कत न हो इस कारण अयोध्या वासियों ने राहों में दीपक जलाए थे। भगवान राम के स्वागत में खूब बाजे बजाए गए थे, संगीत एवं नृत्य के साथ पूरे राजशी परंपराओं सहित राम जी को महल में लाया गया था।

इस दिन दीपक जलाने का भी बहुत ही खास महत्व है। माना जाता है कि धन की देवी लक्ष्मी जी को उजाला बहुत प्रिय है, उन्हें दीपक की रोशनी बहुत अच्छी लगती है जिस कारण लक्ष्मी पूजन के पश्चात हर घर मे बहुत सारे दिए जलाए जाते हैं।

वैज्ञानिक कारणों से भी दीपक जलाना स्वास्थ्य एवम पर्यावरण के लिए उत्तम माना गया है। घी के दीपक जलाने से वातावरण में प्राणवायु की मात्रा बढ़ती है और स्वास्थ्य पर भी उत्तम प्रभाव होता है।तेल के दीपक जब भारी संख्या में जलाए जाते हैं तब बरसाती कीड़े जो मानव जाति के लिए नुकसानदेह होते है उसके धुएं से मारे जाते है।

इस वर्ष की खास दिवाली

इस बार अयोध्या का दीपोत्सव आकर्षण का केंद्र बन चुका है।अयोध्या के दीपोत्सव में 5 लाख से ज़्यादा दीए जलाए जाएंगे।अयोध्या के सभी प्रमुख मंदिरों में लगातार 3 दिनों तक दीपक जलाए जाएंगे।संस्कृत विभाग राम की पेड़ी पर 5,51,000 दीपक जलाएंगे। कॉलेज के छात्र-छात्राएं इस कार्यक्रम में दीपक जलाने की शुरुवात करेंगे।

दीपोत्सव के साथ साथ ही विभिन्न देश जैसे नेपाल,श्रीलंका, फिलीपींस, थाईलैंड, इंडोनेशिया की रामलीलाओं का मंच अयोध्या में सरयू नदी के घाटों पर किया जाएगा।

राम की पेड़ी पर लेज़र शो के माध्यम से रामकथा दिखाई जाएगी।इन सब के साथ ही उत्तर भारत के विभिन्न लोक गीत जैसे आल्हा,बिरहा गाए जाएंगे।साथ ही साथ धोभी,अहीर, और अन्य समाज अपने पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुतु करेंगे। अयोध्या के दीपोत्सव इस बार विश्व रिकॉर्ड बनाने जा रहा है।पिछली बार भी अयोध्या के दीपोत्सव में विश्व कीर्तिमान था। जो गिनीज़ बुक में दर्ज किया गया था। इस बार भी सबसे अधिक दिए जलाने का रिकॉर्ड अयोध्या में बनाया जाएगा। अयोध्या के दीपोत्सव में इस बार सरकार 138 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।बताया जा रहा है कि उत्तरप्रदेश सरकार इस बार दीपोत्सव के बाद कुछ विकास कार्यों का शिलान्यास करने वाली है।अयोध्या दीपोत्सव में पिछली बार की तरह ही इस बार भी कई सारे विदेशी मेहमान भी आएंगे।

विभिन्न राज्यों की विभिन्न दीपावली-

उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल प्रमुख अतिथि होंगी जो सरयू आरती के साथ ही दीपोत्सव के कार्यक्रम की शुरुआत करेंगी। उत्तर भारत मे दिपावली की शुरुआत लक्ष्मी पूजन के एक रात्रि पहले होती है। यमराज जो मृत्यु के देवता माने जाते उन्हें पहला दिया अर्पित किया जाता है।यमराज जी के लिए घर के बाहर एक पुराना दिया जलाया जाता है,और अगले दिन संध्या के वक्त लक्ष्मी पूजन के पश्चात आतिशबाजी की जाती है।

महाराष्ट्र में दीपावली की शुरुवात लक्ष्मी पूजन के दिन प्रातः अभ्यंगस्नान के पश्चात दीपक जलाकर होती है।

दक्षिण भारत के राज्य जैसे केरल,तमिलनाडु यहाँ पर प्रातः घर की लड़कियाँ सुंदर रंगोली गीत गाते हुए बनाती है जिसके बाद शाम के वक्त आतिशबाजी की जाती है।

भारत के दूसरे राज्यों में भी दीपावली लगभग ऐसे ही मनाई जाती है। हर जगह दीपावली के 2 दिन पहले धनतेरस के दिन एक छोटी पूजा कर के लक्ष्मी पूजन के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा के पश्चात आतिशबाजी की जाती है,मिठाइयाँ बाँटी जाती है,लोग अपने मित्र और पड़ोसियों से मिलते हैं जिसके बाद लगभग हर घर मे दीपावली का खास रात्रि भोज का लुत्फ़ उठाया

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