ईरान-खाड़ी युद्ध पर भारत का रुख स्पष्ट, शांति और कूटनीति पर दिया जोर

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने ईरान और खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध को लेकर भारत का स्पष्ट और संतुलित रुख सामने रखा है। उन्होंने कहा कि भारत ने संघर्ष की शुरुआत से ही शांति, संयम और संवाद पर जोर दिया है।
शुरुआत से ही जताई चिंता
हरीश ने बताया कि 28 फरवरी 2026 को जैसे ही इस क्षेत्र में संघर्ष शुरू हुआ, भारत ने तत्काल गहरी चिंता व्यक्त की थी। भारत ने सभी संबंधित देशों से अपील की थी कि वे संयम बरतें, स्थिति को और न बिगाड़ें और आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
कूटनीति ही समाधान
भारत ने लगातार यह दोहराया है कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। हरीश ने कहा कि देशों को आपसी मतभेद शांति से सुलझाने चाहिए और किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई से बचना चाहिए। साथ ही उन्होंने हर देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान को भी आवश्यक बताया।
व्यापारिक जहाजों पर हमले की निंदा
हरीश ने युद्ध के दौरान कॉर्मशियल (व्यापारिक) जहाजों को निशाना बनाए जाने पर गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों में भारतीय नाविकों की भी जान गई है, जो बेहद दुखद है। भारत का मानना है कि व्यापारिक जहाजों पर हमला न केवल निर्दोष लोगों की जान को खतरे में डालता है, बल्कि वैश्विक व्यापार को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व
उन्होंने विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा या असुरक्षा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
भारत ने स्पष्ट किया कि इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही निर्बाध और सुरक्षित रहनी चाहिए। किसी भी तरह का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन जरूरी
भारत ने सभी देशों से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करें और यह सुनिश्चित करें कि समुद्री मार्गों पर सुरक्षा बनी रहे। हरीश ने कहा कि वैश्विक व्यापार और स्थिरता के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।
निष्कर्ष
ईरान-खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर संतुलित और जिम्मेदार वैश्विक भूमिका निभाते हुए शांति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन की वकालत की है। भारत का यह रुख न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
सोर्स ABP न्यूज़
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